प्रशासन के आगे जनता के आंसू मिट्टी मोल
गंजबासौदा-क्षेत्र के चुनिंदा ग्रामीण अंचलों में मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हार समाज की हालत सालों बाद भी सुधरने का नाम नहीं ले रही है। केन्द्र तथा राज्य सरकार की तमाम सारी योजनाएं भी इनके जीवन में कोई नया बदलाव लेकर नहीं आई है। आज भी इस समाज की हालत अत्यन्त दयनीय तथा चिंतनीय है। इनके बच्चे आज भी उच्च शिक्षा को तरस रहे हैं। जबकि अब परेशानियां पहले से और भी बढ़ गई है। कुम्हार बताते हैं कि बर्तन बनाने के लिए मिट्टी तक नहीं मिल पा रही है। वर्तमान में जब गर्मी का मौसम होता है तो कुम्हारों की याद आना स्वभाविक है। चुकिं मिट्टी के मटके (देशी फ्रीज) इन कुम्हारों के द्वारा ही बनाए जाते हैं। तालाबंदी (लॉकडाउन) के बीच यह लोग दोपहर की तपती धूप में भी काम करते हुए मिले। इसके अलावा उन्होंने जो अपनी व्यथा बताई, वह काफी दयनीय और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करने वाली है। तभी तो मिट्टी के बर्तन बनाने वाले इन कुम्हार परिवारों को पेट पालने के लिए लोहे के चने चबाने पड़ रहे हैं। वहीं प्रशासन सरकार इनके परिवारों को सुविधा ,शिक्षा, रोजगार,स्वास्थ्य तो नहीं दे पा रही और इनके पारिवारिक धंधे...