मध्यप्रदेश मे बालिकाओं को लग रही है नजर रोज गायब हो रही है 20 से ज्यादा नाबालिग बच्चियां
राष्ट्रीय बालिका दिवस विशेष खबर-
भोपाल : प्रदेश में बड़े पैमाने पर नाबालिग बच्चे लापता हो रहे हैं। हाल ही में जारी हुई केंद्र सरकार की एनसीआरबी की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों के लापता होने के मामले में देश में मध्यप्रदेश पहले नंबर है। प्रदेश से रोजाना 25 से ज्यादा और महीने में 800 से ज्यादा बच्चे गुमशुदा हो रहे हैं। ये रिपोर्ट जनवरी 2016 से 2019 तक की है। इन चार सालों में प्रदेश से 45 हजार 709 बच्चे गुम हो चुके हैं।देश में गुमशुदा बच्चों में बीस फीसदी अकेले मध्यप्रदेश से हैं।
आज राष्ट्रीय बालिका दिवस भी है जगह जगह प्रदेश मे बालिका दिवस पर आयोजन भी किये जा रहे हैं और मध्यप्रदेश सरकार और पुलिस द्वारा एक अभियान चलाकर बाल अपराध को रोकने के लिये अलग अलग स्थानो पर कार्यक्रम किये जा रहे है कहीं ये केवल खानापूर्ति के आयोजन बनकर ही न रह जाये।
ये हालत तब है जबकि पिछले तीन सालों में पुलिस आधुनिकीकरण पर प्रदेश में 100 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इस रिपोर्ट को लेकर प्रदेश सरकार सकते में है। इन गुमशुदा बच्चों को मानव तस्करी से जोड़कर भी देखा जा रहा है। एंटी ह्यूमन ट्रेफकिंग यूनिट यानी एएचटी यूनिट के हवाले से आई रिपोर्ट में प्रदेश में पिछले तीन सालों में नाबालिग बच्चों की तस्करी का अनुपात बढ़ते हुए दोगुने से ज्यादा हो गया है।
12 महीने में 8572 बच्चियां गुमशुदा :
प्रदेश के गृह विभाग के मुताबिक जनवरी से दिसंबर 2019 तक 12 महीने में राज्य से 8572 बच्चियां लापता हो गई हैं। इस हिसाब से हर महीने 700 से ज्यादा बच्चियां प्रदेश में गुम हो रही हैं। प्रदेश में हजारों मामले मानव तस्करी से जुड़े हैं लेकिन पुलिस उनको गुमशुदा मानती है। प्रकरण भी मानव तस्करी की जगह गुमशुदा का बनाया जाता है।सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन है कि जो बच्चे चार माह तक बरामद न हों उन सभी मामलों को मानव तस्करी माना जाए। प्रदेश में इस गाइड लाइन का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा।


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