राम कथा हर युग में मनुष्य को सतपथ पर चलने की प्रेरणा देती है-डा.रामकमलदासवेदांती
गंजबासौदा एम पी मंगल न्यूज - वेदांत आश्रम में समायोजित पंद्रह दिवसीय श्री राम कथा के तेरहवें दिवस में श्री जगदगुरू अनंतानंद द्वाराचार्य काशीपीठाधीश्वर स्वामी डाॅ रामकमलदास वेदांती जी महाराज ने बताया कि श्री राम कथा हर एक युग में मनुष्य को सतपथ पर चलने की प्रेरणा देती रही है। पिता और पुत्र, पति और पत्नि, राजा और प्रजा, स्वामी और सेवक के बीच में जो मधुर संबंध होने चाहिए उसकी प्रेरणा लेने के लिए श्री राम कथा से बढकर और कोई प्रेरक नहीं हो सकता। तेरहवे दिन की कथा में अहिल्या उद्धार की कथा के माध्यम से स्वामीजी ने नारी के सम्मान की बात कही उन्होने कहा कि जिस देश और धर्म में नारी का सम्मान नही होता वह देश और धर्म प्रतिष्ठित नहीं हो पाता। द्रोपदी का अपमान होने के कारण ही हस्तिनापुर की भूमि रक्त रंजित हुई और कौरवों का सर्वनाश हो गया ।
बङे बङे महारथी एक नारी के अपमान के भागीदार होने के कारण ही भगवान श्री कृष्ण की दृष्टि में आतताई हो गए और श्री कृष्ण ने हर उस योद्धा का वध अर्जुन से करवाया जिनके सामने द्रोपदी का चीरहरण हुआ और वे हाथ पर हाथ रखकर देखते रहे सबसे बङा अधर्म अन्याय और अनीति का विरोध न करना है अहिल्या प्रसंग में स्वामी जी ने बताया कि धरती पर ऐंसा कोई इंसान नहीं है जिससे जीवन में कोई गलती न हुई हो हमें स्वजनों की गलती को क्षमा कर देना चाहिए और उन्हे ह्रदय से लगाकर परिवार और समाज का संगठन मजबूत बनाए रखना चाहिए ऋषि के श्राप से पत्थर बनी अहिल्या का उद्धार कर भगवान श्री राम ने बताया कि क्षमा ही सबसे बड़ा सदगुण है। राजा जनक ने राम और लक्ष्मण सहित विश्वामित्रजी का जनकपुरी में स्वागत किया और फिर भगवान श्री राम जनकपुर की बीथीयों विचरण कर सामान्य नर नारीयों को अपना दर्शन देकर उनके जीवन को कृतार्थ करते हैं। परमात्मा को प्रसन्न करने का सबसे बङा साधन प्रेम ही है हम कितना भी जप तप अनुष्ठान करें लेकिन यदि प्रेम नहीं है तो भगवद प्राप्ति सर्वदा असंभव है।
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